Monthly Archives: July 2015

दुनिया का शोर

वीरां-सी डगर पर, जब मैं खुद को समेटे निकला। आसमां के तारे भी साथ हो लिए। बादलों का गुच्छा भी साथ चलने लगा जैसे। मानो आज कुदरत भी जाना चाहती थी, इस दुनिया से दूर। शोर भरी दुनिया से दूर। … Continue reading

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