Monthly Archives: August 2015

भीष्म का दर्द

कुरुक्षेत्र में रक्त रंजित नदियाँ बह रही थी अविरल। शवों का ढेर बढ़ रहा था  हर पल , एक सूरज रोज डूबता था आने को कल और देवव्रत बाणों की शैया पर पड़ा था निश्चल। पृथ्वी को रक्त से नहला रहे … Continue reading

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