ये होसला कैसे झूके…..


ये होसला कैसे झूके…..

हमारे टुकड़ों में पलने वाला आज हस रहा है
उससे लग रहा हमारे शेरों को छल से मार कर वो जग जीता है
पर बेचारे को ये नही पता…शामत आने वाली है
तुम क्या जानो बाप का होसला क्या होता है
अपने बचों के हस्सी के लिए वो कुछ भी कर सकता है
अहसान फरामोश की तो फितरत येही है
पीछे से वार करना ही उनकी नियत है
जो खुद के खून के ना हुए वो औरों का कैसे होंगे
लेकिन अब इंसानियत के धुस्मानो का घमंड टूटेगा
क्यूंकि ये होसले कभी नहीं झुकेगा
भीष्म को तो इच्छा मृत्यु मिली थी वरदान में
मृत्यु से पहले ही कौरवों और पांडवों की लड़ाई में मर चुके थे वो
परिवार में जब फूट आता है तो सबसे पहले बड़े हारते है
भरोसा खोता है और होसले झुकते है और आरजू मरता है
ये वक़्त है आपस का बैर मिटाने का
भीष्म के भारत को शसक्त करने का
तभी जाके शत्रु का अंत संभव है
क्यूंकि यहाँ होसले का ही ज़रुरत है

आज वक़्त है मिलकर खड़ा होने का
उन नमक हलालों को सबक सिखाने का
यज्ञं अधुरा है , आहुति अभी बाकि है
ये होसला कैसे झुके , युद्ध में विजय तो अभी आधी है
-अंशुमान

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