Category Archives: Literature

में हिंदू हूँ …

जब कोई पूछे मुझे कौन हूँ मैं, जानना चाहता है वो कि क्या मजहब है मेरा, लेकिन क्या आज इंसान का इंसान होना काफी नहीं? कहने को तो पंथ अनेक हमारे, लेकिन फिर अंतिम रहा तो एक ही है वही… … Continue reading

Posted in Literature, Religious, Thought processing | Tagged | Leave a comment